//Michael Faraday – English Scientist, Worked on Electromagnetism And Electrochemistry / माइकल फराडे
Michael Faraday biography in hindi

Michael Faraday – English Scientist, Worked on Electromagnetism And Electrochemistry / माइकल फराडे

कुछ लोग अपनी असफलता के लिए परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें कुछ नहीं मिलता और वह इतिहास रच कर चले जाते हैं। माइकल फराडे एक ऐसे वैज्ञानिक हैं जो गरीबी के चलते कभी स्कूल नहीं गए और अपनी इच्छाशक्ति से, चीजों को जानने की जिज्ञासा की वजह से, दुनिया का सबसे महान वैज्ञानिक बन गए। इन्होंने हमारी दुनिया को पूरी तरह से बदल कर रख दिया। माइकल फराडे को “फादर ऑफ इलेक्ट्रिसिटी” के नाम से भी जाना जाता है।

एक ऐसे वैज्ञानिक जिसका बचपन गरीबी में बीता। वह पढ़ने में ज्यादा कुछ खास नहीं थे। वह दिन में किताबों पर जिल्त चढ़ाया करते थे और रात में उन्हीं किताबों को पढ़कर इलेक्ट्रिसिटी के बारे में अपनी जिज्ञासा को बढ़ाते रहें। एक साइंस शो की टिकट ने उनका जीवन बदल कर रख दिया। उन्होंने अपनी जिज्ञासा और बुद्धि के दम पर हमें एक नया जीवन दिया। अगर फराडे बिजली का आविष्कार ना करते तो कोई भी डिवाइस, सभी इलेक्ट्रिक चीजें, पंखे सारी मोटर आदि कोई भी काम नहीं करती। सब हमारे लिए असंभव होता। सर माइकल फराडे” इन सभी असंभव को संभव करने वाले दुनिया के महान वैज्ञानिक “है।

माइकल फराडे का जन्म 22 सितंबर 1791 को इंग्लैंड में हुआ था। उनके पिता का नाम “जेम्स फराडे” था जो कि एक गरीब लुहार थे। बचपन में थोड़ी बहुत पढ़ाई के साथ-साथ यह अपने पिता के साथ काम भी करते थे। माइकल फराडे अपने माता-पिता के चार बच्चों में तीसरे नंबर पर थे। उन्होंने अपना जीवन लंदन में बुक बाइंडिंग की नौकरी से प्रारंभ किया। 13 साल की उम्र में वह किताबों पर जिल्त चढ़ाने वाले कारखाने में काम करने लगे। माइकल फराडे दिन में किताबों पर जिल्त चढ़ाते और रात में उन्हीं किताबों को पढ़ा करते थे। यहीं से उनके इलेक्ट्रिसिटी के प्रति जुनून की शुरुआत हुई। सर माइकल फराडे रूढ़िवादी क्रिश्चियन परिवार की परंपराओं को बेहद दिल से मानते थे और इसी से उन्हें ताकत सुकून और विनम्रता का एहसास होता था। कई सालों तक बुक बाइंडिंग का काम करते हुए फराडे 21 साल के हो चुके थे। अब वह बड़ी दुनिया में जाने का ख्वाब देख रहे थे।

उन दिनों उनके काम से प्रभावित होकर उनके ग्राहक ने उन्हें एक साइंस मनोरंजन शो “Science of the Public” का टिकट दिया। दरअसल सर H. Davy उस दौर के माने हुए वैज्ञानिक और साथ ही मंजे हुए शो मैन भी । उनका काम लोगों को बेहद पसंद आता था। जब माइकल फराडे उनका शो देखने गए तो उन्होंने, उनकी एक- एक बात को ध्यान से सुना और उसको नोट कर लिया। माइकल फराडे को बुक बाइंडिंग का काम तो आता ही था, उन्होंने Sir H.DAVY के शो की पूरी बातों को एक बुक में जैसा का तैसा किताब के रूप में तैयार कर दिया। उन्होंने सोचा कि शायद यह तोहफा H.DAVY को देने, उन्हें उनके पास जाने का एक और मौका मिलेगा। उन्होंने यह यह किताब DAVY को भेजी। SIR H. DAVY को माइकल फराडे का काम बेहद पसंद आया। उन्हीं दिनों एक प्रयोग करते हुए डेवी की आंख में कुछ दिक्कत हो गई थी। अब उन्हें एक असिस्टेंट की जरूरत थी। डैवी को माइकल फराडे की याद आई,
जिन्होंने उनके शो में कही गई उनकी एक एक लाइन को जैसा का तैसा किताब की शक्ल में उन्हें भेजी थी। डैवी ने माइकल फराडे को अपने यहां काम पर रख लिया और माइकल फराडे ने उनका सारा काम संभाल लिया। माइकल फराडे को नौकरी कुछ दिनों के लिए मिली थी परंतु वह पक्की नौकरी में तब्दील हो गई। “Royal Institute” उनके लिए घर की तरह हो गया। दिन में वह डेवी की मदद करते और शाम को वह सीढ़ियां चढ़कर अपने छोटे से अपार्टमेंट में पहुंच जाते, जहां उनकी पत्नी “सारा” उनका इंतजार कर रही होती थी।

एक दिन “H. DAVY” और “केमिस्ट विलियम विलसन” एक अजीब सी चीज को लेकर प्रयोग कर रहे थे, जो आगे चलकर बहुत काम की चीज बन गई। दरअसल वर्ष 1820 में एक वैज्ञानिक ने अपनी खोज में बताया था कि कोई भी करंट कैरिंग कंडक्टर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है यानी कि किसी तार में से विद्युत की धारा को गुजारा जाए तो उससे चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न किया जा सकता है। उनकी इसी खोज से माइकल फराडे को विचार आया कि यदि विद्युत धारा के प्रभाव से चुंबकीय प्रभाव हो सकता है तो क्या ऐसा संभव नहीं है की चुंबकीय प्रभाव की मदद से हम विद्युत करंट पैदा कर सके। यह सोच बहुत साधारण सी लगती है परंतु इसी सोच ने आने वाले समय की पूरी मानव सभ्यता को बदल कर रख दिया। अपनी सोच को परखने के लिए उन्होंने एक प्रयोग किया जिसमें तार की एक कुंडली यानी कि कॉइल बनाकर चुंबक के पास रखी गई, लेकिन उन्हें कॉल में कोई भी बिजली बनती हुई दिखाई नहीं दी उन्होंने कई बार अपने प्रयोग को दोहराया किंतु उन्हें हर बार नाकामी हाथ लगी। तंग आकर एक दिन उन्होंने कुंडली यानी कि कॉइल को फेंकने के लिए चुंबक के पास से खींचा और उसी समय गैल्वेनोमीटर जो कि एक करंट मैंसिंग डिवाइस होता है में रीडिंग आने लगी। उसी समय सर फराडे को यह ज्ञात हुआ कि यदि कुंडली यानी कि कॉइल और चुंबक के बीच में आपेक्षिक गति यानी कि रिलेटिव स्पीड को चेंज करा जाए तो इससे कॉइल में करंट पैदा किया जा सकता है और इस सिद्धांत को हम आज “इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन” के नाम से जानते हैं।

आज पूरे विश्व में इसी तरीके से बिजली का उत्पादन होता है। इसी खोज ने मानव सभ्यता पर बड़ा गहरा असर डाला। परंतु सर माइकल फराडे यहां कहां रुकने वाले थे और वह तरह-तरह के प्रयोग करने लगे। उन्होंने एक प्रयोग में पाया कि अगर हम दो कॉइल को पास में रखते हैं और उसमें से एक कॉइल में से करंट को पास करते हैं तो दूसरे कॉइल में भी अपने आप ही करंट बनाने लगेगा क्योंकि जो पहला कॉइल है उसमें इलेक्ट्रिक करंट की वजह से मैग्नेटिक फील्ड पैदा होगी और जब दूसरे कॉल की मैग्नेटिक फील्ड चेंज होगी तो उसमें करंट बनने लगेगा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन सिद्धांत के अनुसार। इसी सिद्धांत को आज हम ट्रांसफार्मर में इस्तेमाल करते हैं।

रसायन विज्ञान में फ्राइडे ने “BENZENE ” की खोज की जिसका आज व्यापक पैमाने में इस्तेमाल होता है साथ ही उन्होंने “Oxidation Number” का कंसेप्ट दिया जिसका इस्तेमाल रसायनिक समीकरण यानी कि केमिकल इक्वेशन को बैलेंस करने में होता है।

अपने जीवन काल में माइकल फराडे ने अनेक खोजे की। वह जीवन भर बिना किसी स्वार्थ के अपने कार्य में लगे रहे। अपनी मेहनत एवं लगन से कार्य कर के महान सफलता प्राप्त करने का इससे अच्छा उदाहरण वैज्ञानिक इतिहास में नहीं मिलेगा। Sir H. DAVY माइकल फराडे को भी, अपनी सबसे बड़ी खोज मानते थे। सर माइकल फराडे का विवाह 12 जून 1821 को ‘सारा’ के साथ हुआ था। उन्हें कोई संतान नहीं थी। 25 अगस्त 1867 को 76 वर्ष की अवस्था में इस महान वैज्ञानिक का स्वास्थ्य बिगड़ जाने के कारण निधन हो गया। माइकल फराडे अपने महान आविष्कारों के लिए सदैव याद रखे जाएंगे।