//Tomas Bata – Multinational Retailers, Manufacturers, And Distributors of Footwear / थॉमस बाटा
Tomas Bata biography in hindi

Tomas Bata – Multinational Retailers, Manufacturers, And Distributors of Footwear / थॉमस बाटा

Tomas Bata biography in hindi – “जिसने जिंदगी को खुलकर जिया
उसे मुकाम भी मिले और खुशियां भी,
और जो सोचता रह गया
वह तो बस सोचता ही रह गया।”

थॉमस एक “आम मोची” से मल्टीनेशनल कंपनी का मालिक बने जिसकी शोहरत आज भी बरकरार है। शुरुआत में थॉमस ने मोची काम शुरू किया। उसके लिए थॉमस ने दुकान खोल ली और अपने साथ कुछ मजदूर भी रख लिए। वह कुछ महीने दुकान पर जाता था परंतु हर कदम पर नाकामी मिल रही थी। लोग इसके जूते खरीदते नहीं थे। थॉमस हिम्मत हार कर घर पर बैठ गया और उसने दुकान पर जाना छोड़ दिया और वह परेशान रहने लगा। एक दिन उसकी मुलाकात एक बूढ़े मजदूर से हुई जो तजुर्बे से मालामाल था। उस बूढ़े मजदूर ने थॉमस के चेहरे से परेशानी भाप ली और वजह पूछी, तो थॉमस ने उसे सारी बात बता दी। उस मजदूर ने कहा- बेटा “यह ख्याल रखो कि मेरी प्रोडक्ट महंगी है और मैं मजदूरों को उसकी मेहनत से कम तनख्वाह देता हूं और किसी तरह आप यह कोशिश करते रहो कि किस तरह मेरी प्रोडक्ट सस्ती हो और मेरे मजदूरों को ज्यादा तनखा मिले।” यह बात थामस के दिल पर लगी और उसने यह बात हमेशा के लिए अमल करने की ठान ली। करीब 300 वर्ष से मोची का काम उनके खानदान में चला आ रहा था, लेकिन किसी ने भी इस को आगे बढ़ाने की तरफ ध्यान नहीं दिया। 24 अगस्त 1894 को पहली बार थॉमस टाटा ने जूते का कारखाना लगाया। यही कारखाना बढ़ते -बढ़ते एक मल्टीनेशनल कंपनी की सूरत में तब्दील हो गया।

दुनिया के जाने-माने फुटवियर बाटा जिसके सफलता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि एक समय ऐसा भी था कि जूते का मतलब ही “बाटा” हुआ करता था। लेकिन पैरों से हमारे दिलों पर राज करने वाले बाटा ब्रांड का सफर इतना आसान भी नहीं था। इसकी शुरुआत एक मोची के घर से हुई थी। फिर मेहनत लगन और अच्छी सोच के दम पर थामस बाटा ने इसे दुनिया पर राज करने वाला फुटवियर ब्रांड बना दिया।

1894 से जब चेकोस्लोवाकिया के शहर “ZLIN” में थामस टाटा ने अपने भाई “एंटोनिन” और बहन “ऐना” के साथ मिलकर जूते बनाने की शुरुआत की और इस कंपनी में उन्होंने 10 काम करने वाले मजदूर भी रखें। थॉमस के लिए यह काम नया नहीं था क्योंकि उनकी कई पीढ़ियां मोची का काम करती चली आ रही थी लेकिन अपने हुनर को इतने बड़े स्तर पर आजमाने का रिस्क थॉमस बाटा ने लिया लेकिन किसी भी काम की शुरुआत बहुत सारी मुश्किलें लेकर आती है और ऐसा ही बाटा परिवार के साथ भी हुआ।

कंपनी स्थापित करने के अगले ही साल थॉमस को पैसे की कमी का सामना करना पड़ा और कर्ज में डूबे टॉमस ने लेदर की बजाय कैनवास से जूते बनाने का फैसला किया। लेकिन उनके इस फैसले ने एक नए आइडिया को जन्म दिया और कैनवस सस्ता होने की वजह से, उनके बनाए गए जूते बहुत तेजी से मशहूर होने लगे इसके बाद कंपनी की ग्रोथ काफी बढ़ती चली गई।

कुछ साल बाद 1904 में थॉमस अमेरिका गए और यह सीख कर आए कि वहां पर बहुत सारे जूतों को एक साथ बनाने का कौन सा तरीका अपनाया जाता है। उस टेक्निक को अपनाते हुए उन्होंने अपनी प्रोडक्शन पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा ली। फिर उन्होंने ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए “BATOVKY” नाम का जूता बनाया। इस जूते का स्टाइल, हल्का होने की वजह से और कम कीमत के लिए लोगों ने काफी पसंद किया और इसके पापुलैरिटी ने बाटा कंपनी की ग्रोथ काफी हद तक बढ़ा दी। लेकिन आगे चलकर टॉमस के भाई एंटोनी की मृत्यु हो गई और उनकी बहन भी शादी करके चली गई जिससे वह अकेले पड़ गए। लेकिन टॉमस बिना रुके चलते रहने का इरादा रखने वालों में से एक थे। उन्होंने अपने छोटे भाइयों को बिजनेस में शामिल कर लिया और किसी भी समस्या को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।

साल 1914 में जब प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ, तब क्वालिटी और कंफर्ट के लिए पहचाने जाने वाली इस कंपनी को, सेना के लिए जूते बनाने का ऑर्डर मिला। 1918 तक चली इस विश्व युद्ध के दौरान ऑर्डर को वक्त पर पूरा करने के लिए बाटा कंपनी ने मजदूरों की संख्या 10 गुना बढ़ा दी गई और इस कंपनी ने बहुत से शहरों में अपने स्टोर्स भी खोल लिए। यहां तक थॉमस बाटा के साथ बहुत अच्छा चल रहा था, लेकिन विश्व युद्ध खत्म होने के बाद जबरदस्त मंदी का दौर आया जो बाटा शू कंपनी के लिए भी एक बहुत बड़ी समस्या लेकर आया। लेकिन इस बार भी टॉमस ने इस परेशानी का बहुत अच्छे तरीके से हल ढूंढ लिया और कंपनी के लिए एक जोखिम भरा फैसला लिया कि “बाटा शूज की कीमत आधी कर दी”। कंपनी के वर्कर्स ने भी थामस बाटा का बखूबी साथ दिया और अपनी तनख्वाह में कटौती करने को तैयार हो गए।

व्यापार असलियत में एक टीम वर्क होता है। अगर आपकी टीम आपके साथ है तो कोई भी समस्या हम पर हावी नहीं हो सकती। बहुत ही जल्द जूतों की कीमत आदि होने और उनके टीम वर्क ने ऐसा कमाल कर दिखाया कि मंदी के जिस वक्त में बाकी सारी कंपनियां अपना बिजनेस बंद करने की कगार पर थी वही “बाटा कंपनी” को सस्ते वह आरामदायक जूते बनाने के ढेरों ऑर्डर्स मिलने लगे। यहां से टॉमस और उनकी बाटा कंपनी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे यह दुनिया की सबसे बड़ी फुटवियर बनाने वाली ब्रांड बन गई। और आज तक बाटा ब्रांड लगभग 70 से भी ज्यादा देशों में अपनी पहचान बना चुका है।

बाटा कंपनी का हेड क्वार्टर “स्विट्जरलैंड” में मौजूद है। इस सफलतापूर्वक ब्रांड को स्थापित करने वाले टॉमस बांटा ने 1932 में दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन उनकी जिंदगी ने दुनिया को बहुत कुछ सिखा दिया है।

“जो बीच राह में बैठ गए, वह बैठे ही रह जाते हैं
जो लगातार चलते रहते, निश्चय ही मंजिल पाते हैं।”